आचार्य चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ सुविचार

आचार्य चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ सुविचार | Chanakya Quotes in Hindi

“जैसे एक बछड़ा हज़ारो गायों के झुंड
मे अपनी माँ के पीछे चलता है।
उसी प्रकार आदमी के अच्छे
और बुरे कर्म उसके पीछे चलते हैं।”

व्यक्ति अकेले ही पैदा होता है
और अकेले ही मर जाता है
और वो अपने अच्छे और बुरे
कर्मो का फल खुद ही भुगतता है।
वह अकेले ही नरक या स्वर्ग जाता है।

अपमानित हो के जीने से अच्छा मरना है।
मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है,
लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है।

अहंकार उसी को होता है,
जिसे बिना मेहनत के सब कुछ मिल जाता है,
मेहनत से सुख प्राप्त करने वाला व्यक्ति,
दूसरों की मेहनत का भी सम्मान करता है।

जीवन में तीन मंत्र
आनंद में वचन मत दीजिए,
क्रोध में उत्तर मत दीजिए,
दुख में निर्णय मत लीजिए।

दुष्ट स्त्री बुद्धिमान व्यक्ति के
शरीर को भी निर्बल बना देती है।

“विद्या को चोर भी
नहीं चुरा सकता।”

समय को पहचानना ही
मनुष्य के सीखने की
सर्वोत्तम कला मानी गई है।

प्रेम से भरी हुई आंखें,
श्रद्धा से झुका हुआ सिर,
सहयोग करते हुए हाथ,
सन्मार्ग पर चलते हुए पाँव
और सत्य से जुड़ी हुई जीभ,
ईश्वर की पसंदीदा चीजें है।

दुख भोगने वाला आगे
चलकर सुखी हो सकता है,
लेकिन दुख देने वाला
कभी सुखी नहीं हो सकता।

पहले निश्चय करिए,
फिर कार्य आरम्भ करिए।

अच्छे समय से ज्यादा,
अच्छे इंसान के साथ रिश्ता रखो,
अच्छा इंसान अच्छा समय ला सकता है,
अच्छा समय अच्छा इंसान नहीं ला सकता।

जरूरत से ज्यादा वक्त
और इज्जत देने से
लोग आप को गिरा हुआ
समझने लगते हैं।

“आदमी अपने जन्म से नहीं
अपने कर्मों से महान होता है।”

ऋण, शत्रु और रोग को
समाप्त कर देना चाहिए।

कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिये जो
आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हों।
ऐसी मित्रता कभी आपको ख़ुशी नहीं देगी।

हर नई शुरुआत थोड़ा डराती है,
पर याद रखो सफलता
मुश्किलों के पास ही नजर आती है।

झुको केवल उतना ही जितना सही हो,
बेवजह झुकना केवल
दूसरों के अहम को बढ़ावा देता है।

“एक समझदार आदमी को सारस की तरह होश
से काम लेना चाहिए और जगह,
वक्त और अपनी योग्यता को समझते हुए
अपने कार्य को सिद्ध करना चाहिए।”
एक ही देश के दो शत्रु परस्पर मित्र होते हैं।

एक ही देश के दो शत्रु
परस्पर मित्र होते हैं।

सबसे बड़ा गुरु मन्त्र है :
कभी भी अपने राज़ दूसरों को मत बताएं.
ये आपको बर्वाद कर देगा।

खुश रहने का मतलब यह नहीं कि सब कुछ ठीक है,
बल्कि इसका मतलब यह है कि
अपने दुखों के ऊपर जीवन जीना सीख लिया है।

मैदान में हारा हुआ फिर से जीत सकता है,
परंतु मन से हारा हुआ कभी जीत नहीं सकता,
आपका आत्म विश्वास ही सर्वश्रेष्ठ पूंजी है।

मनुष्य की वाणी ही विष
और अमृत की खान है।

“ईश्वर मूर्तियों में नहीं है।
आपकी भावनाएँ ही आपका ईश्वर है।
आत्मा आपका मंदिर है।”

भगवान मूर्तियों में नहीं है,
आपकी अनुभूति आपका इश्वर है,
आत्मा आपका मंदिर है।

वो जिसका ज्ञान बस किताबों तक सीमित है
और जिसका धन दूसरों के कब्ज़े मैं है,
वो ज़रुरत पड़ने पर ना अपना
ज्ञान प्रयोग कर सकता है ना धन।

जब जीवन के बारे में सोचो तब यह सदैव याद रखना कि,
पछतावा अतीत बदल नहीं सकता,
और चिंता भविष्य को सवार नहीं सकती,
एकाग्रता से किया गया परिश्रम ही
वास्तविक चमत्कार करता है।

संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है,
संतोष जैसा कोई सुख नहीं है,
लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है,
और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है।

अगर सांप जहरीला ना भी हो तो
उसे खुद को जहरीला दिखाना चाहिए।

इस बात को व्यक्त मत होने दीजिये कि
आपने क्या करने के लिए सोचा है,
बुद्धिमानी से इसे रहस्य बनाये रखिये
और इस काम को करने के लिए दृढ रहिये।

भूखा पेट, खाली जेब और झूठा प्रेम
इंसान को जीवन में
बहुत कुछ सीखा जाता है।

जो ज्ञानी होता है उसे समझाया जा सकता है,
जो अज्ञानी होता है उसे भी समझाया जा सकता है,
परंतु जो अभिमानी होता है उसे कोई नहीं समझा सकता,
उसे वक्त ही समझाता है।

“एक राजा की ताकत उसकी शक्तिशाली भुजाओं में होती है।
ब्राह्मण की ताकत उसके आध्यात्मिक ज्ञान में
और एक औरत की ताक़त उसकी खूबसूरती,
यौवन और मधुर वाणी में होती है।”

वृद्ध पुरुषों की सेवा के द्वारा मनुष्य व्यवहार
कुशलता का ज्ञान प्राप्त
कर श्रेय की प्राप्ति कर सकता है।

एक उत्कृष्ट बात जो शेर से सीखी जा सकती है
वो ये है कि व्यक्ति जो कुछ भी करना चाहता है
उसे पूरे दिल और ज़ोरदार प्रयास के साथ करे।

जिसने हर क्षण को महोत्सव बनाया हो,
जिसकी शिकायतें कम हो,
और जिसने हर छोटी उपलब्धि के लिए भी
ईश्वर का धन्यवाद किया हो,
ऐसे व्यक्ति को दुख का आभास बहुत ही कम होता है।

Chanakya Quotes in Hindi

वो रहिए जो आप हैं
और वो कहिए जो आप महसूस करते हैं,
क्योंकि जो लोग बुरा मानते हैं मायने नहीं रखते,
जो लोग मायने रखते हैं वो बुरा नहीं मानते।

व्यसनी व्यक्ति कभी
सफल नहीं हो सकता।

“आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है।
अर्थात दुष्ट व्यक्ति का कितना भी सम्मान कर लें,
वह सदा दुःख ही देता है।”

दूसरों की गलतियों से भी सीख लेनी चाहिए,
क्योंकि अपने ही ऊपर प्रयोग
करने पर तुम्हारी आयु कम पड़ जाएगी।

जैसे ही भय आपके करीब आये,
उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिये।

बीस वर्ष की आयु में व्यक्ति का जो चेहरा रहता है,
वह प्रकृति की देन है,
तीस वर्ष की आयु का चेहरा जीवन के उतार-चढ़ाव की देन है,
लेकिन पच्चास वर्ष की आयु का चेहरा व्यक्ति की अपनी कमाई है।

व्यक्ति अपने गुणों से ऊपर उठता है,
ऊचे स्थान पर बैठ जाने से ही
उच्च नहीं हो सकता।

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आपका हमेशा खुश रहना
आपके दुश्मनों के लिए सबसे बड़ी सजा है।

इच्छाएं मनुष्य को जीने नहीं देती,
और मनुष्य इच्छाओं को कभी मरने नहीं देता।

स्वाभिमान इतना भी मत
बढ़ाना की अभिमान बन जाए
और अभिमान इतना भी मत
करना की स्वाभिमान मिट जाए।

पुस्तकें एक मुर्ख
आदमी के लिए वैसे ही हैं,
जैसे एक अंधे के लिए आइना।

लोहे को लोहे से ही
काटना चाहिए।

किसी मूर्ख व्यक्ति के लिए किताबें उतनी ही
उपयोगी हैं
जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए आईना।

तुम समय को रोक नहीं सकते,
परंतु समय को बर्बाद न करना
सदैव तुम्हारे नियंत्रण में ही है।

जिसकी आंखों में नींद है उसके पास अच्छा बिस्तर नहीं,
जिसके पास अच्छा बिस्तर है उसकी आंखों में नींद नहीं,
जिसके पास दया है उसके पास किसी को देने के लिए धन नहीं
और जिसके पास धन है उसके मन में दया जैसी कोई चीज नहीं।

यदि माता दुष्ट है
तो उसे भी त्याग देना चाहिए।

संकट में बुद्धि भी
काम नहीं आती है।

सरल को कठिन बनाना आसान है,
परंतु कठिन को सरल बनाना मुश्किल,
और जो कठिन को सरल बनाना जानता है,
वह व्यक्ति विशेष है।

तुलसी को कभी वृक्ष न समझे,
गाय को कभी पशु न समझे,
और माता पिता को कभी मनुष्य न समझे ,
क्योंकि ये तीनों तो साक्षात भगवान का रूप है।

जो अपने कर्म को नहीं
पहचानता, वह अंधा है।

“जो जिस कार्ये में कुशल हो
उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।”

आग में आग नहीं डालनी चाहिए
अर्थात् क्रोधी व्यक्ति को
अधिक क्रोध नहीं दिलाना चाहिए।

सारस की तरह एक बुद्धिमान व्यक्ति को
अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए
और अपने उद्देश्य को स्थान की जानकारी,
समय और योग्यता के अनुसार प्राप्त करना चाहिए।

पत्थर तब तक सुरक्षित है जब तक वो पर्वत से जुड़ा है,
पत्ता तब तक सुरक्षित है जब तक वो पेड़ से जुड़ा है
और इंसान तब तक सुरक्षित है जब तक परिवार से जुड़ा है,
क्योंकि परिवार से अलग होकर आजादी तो मिल जाती है,
लेकिन संस्कार चले जाते हैं।

दंड का भय ना होने से
लोग अकार्य करने लगते हैं।

“जैसे एक सूखा पेड़ आग लगने
पे पुरे जंगल को जला देता है।
उसी प्रकार एक दुष्ट पुत्र
पुरे परिवार को खत्म कर देता है।”

शासक को स्वयं योग्य
बनकर योग्य प्रशासकों की
सहायता से शासन करना चाहिए।

जब आप किसी काम की शुरुआत करें,
तो असफलता से मत डरें और
उस काम को ना छोड़ें।
जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं
वो सबसे प्रसन्न होते हैं।

जो व्यक्ति अपनी गलतियों के लिए
अपने आप से लड़ता है,
उसको कोई नहीं हरा सकता।

प्रकृति का कोप सभी
कोपों से बड़ा होता है।

जिस आदमी से हमें काम लेना है,
उससे हमें वही बात करनी चाहिए जो उसे अच्छी लगे।
जैसे एक शिकारी हिरन का
शिकार करने से पहले मधुर आवाज़ में गाता है।

यदि खुद कुबेर भी अपनी
आय से अधिक खर्च करने लगे
तो वह एक दिन निर्धन हो जायेगा।

ये मत सोचो की प्यार और लगाव एक ही चीज है।
दोनों एक दूसरे के दुश्मन हैं।
ये लगाव ही है जो प्यार को खत्म कर देता है।

किसी के बुरे वक्त पर हंसने
की गलती मत करना,
ये वक्त है चेहरे याद रखता है ।

जिसकी आत्मा संयमित होती है,
वही आत्मविजयी होता है।

वो व्यक्ति जो दूसरों के गुप्त
दोषों के बारे में बातें करते हैं,
वे अपने आप को बांबी में आवारा
घूमने वाले साँपों की तरह बर्बाद कर लेते हैं।

Chanakya Quotes in Hindi

मूर्खों से अपनी तारीफ सुनने से अच्छा है
कि आप किसी बुद्धिमान की डांट सुनें।

कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है,
अपने जन्म से नहीं।

क्रोध में बोला एक कठोर शब्द
इतना जहरीला हो सकता है कि
आपकी हजार प्यारी बातों को एक
मिनट में नष्ट कर सकता है।

जब मेहनत करने के बाद भी सपने पूरे नहीं होते,
दो रास्ते बदलिए सिद्धांत नहीं,
क्योंकि पेड़ भी हमेशा पत्ते बदलता है जड़ नहीं,
गीता में साफ शब्दों ने लिखा है,
निराश मत होना कमजोर तेरा वक्त है,
तू नहीं।

एक आदर्श पत्नी वो है जो अपने पति की
सुबह माँ की तरह सेवा करे और दिन में
एक बहन की तरह प्यार करे
और रात में एक वेश्या की तरह खुश करे।

नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने
वाला ही सच्चा मित्र होता है,
इतिहास गवाह है
कि आज तक कभी नमक में कीड़े नहीं पडे।

जो जिस कार्य में कुशल हो
उसे उसी कार्य में लगना चाहिए।

वो जो अपने परिवार से अति लगाव रखता है
भय और दुख में जीता है।
सभी दुखों का मुख्य कारण लगाव ही है,
इसलिए खुश रहने के लिए लगाव का त्याग आवशयक है।

पडोसी राज्यों से सन्धियां तथा
पारस्परिक व्यवहार का
आदान-प्रदान और संबंध विच्छेद आदि
का निर्वाह मंत्रिमंडल करता है।

प्रेम और आस्था दोनों पर ही
किसी का जोर नहीं है,
ये मन जहाँ लग जाए वहीं पर
भगवान नज़र आता है।

कौन कहता है जैसा संग वैसा रंग,
इंसान लोमड़ी के साथ नहीं रहता फिर भी शातिर है,
इंसान शेर के साथ नहीं रहता फिर भी क्रूर है,
और तो इंसान वो फितरत है जो कुत्ते के साथ रहता है,
फिर भी वफादार नहीं है।

सेवक को तब परखें जब वह काम ना कर रहा हो,
रिश्तेदार को किसी कठिनाई में,
मित्र को संकट में, और पत्नी को घोर विपत्ति में।

कच्चा पात्र कच्चे पात्र से
टकराकर टूट जाता है।

पहले पांच सालों में अपने बच्चे को बड़े प्यार से रखिये।
अगले पांच साल उन्हें डांट-डपट के रखिये।
जब वह सोलह साल का हो जाये तो उसके साथ एक
मित्र की तरह व्यवहार करिए।
आपके वयस्क बच्चे ही आपके सबसे अच्छे मित्र हैं।

जो गुजर गया उसकी चिंता नहीं करनी चाहिए,
ना ही भविष्य के बारे में चिंतिंत होना चाहिए।
समझदार लोग केवल वर्तमान में ही जीते हैं।

शुक्र है कि मौत सबको आती है,
वरना अमीर लोग तो इस बात का मजाक उड़ाते,
कि गरीब था इसलिए मर गया।

किसी विशेष प्रयोजन के लिए
ही शत्रु मित्र बनता है।

सिंह भूखा होने पर भी
तिनका नहीं खाता।

गरीब धन की इच्छा करता है,
पशु बोलने योग्य होने की,
आदमी स्वर्ग की इच्छा करते हैं
और धार्मिक लोग मोक्ष की।

किसी को ज्ञान उतना ही दो
जितना वो समझ सके,
क्योंकि बाल्टी भरने के बाद
नल ना बंद करने से पानी व्यर्थ हो जाता है।

आप किसी के लिए चाहे अपना वजूद दाव पर लगा दो,
वह तब तक आपका है जब तक आप उसके काम के हो,
जिस दिन आप उसके काम के नहीं रहोगे,
या कोई गलती कर दोगे,
उस दिन वह आपकी सारी अच्छाई भूल कर अपनी औकात दिखा देगा।

सर्प, नृप, शेर, डंक मारने वाले ततैया,
छोटे बच्चे, दूसरों के कुत्तों, और एक मूर्ख:
इन सातों को नीद से नहीं उठाना चाहिए।

अन्न के सिवाय कोई
दूसरा धन नहीं है।

सांप के फन, मक्खी के मुख
और बिच्छु के डंक में ज़हर होता है।
पर दुष्ट व्यक्ति तो इससे भरा होता है।

संबंध इसलिए नहीं सुलझ पाते,
क्योंकि लोग दूसरों की बातों में आकर
अपनों से उलझ जाते हैं।

यदि किसी का स्वभाव अच्छा है
तो उसे किसी और गुण की क्या जरूरत है ?
यदि आदमी के पास प्रसिद्धि है
तो भला उसे और किसी श्रृंगार की क्या आवश्यकता है ?

भूख के समान कोई
दूसरा शत्रु नहीं है।

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फूलों की सुगंध केवल वायु
की दिशा में फैलती है।
लेकिन एक व्यक्ति की
अच्छाई हर दिशा में फैलती है।

समझदारी की बाते सिर्फ दो ही लोग करते हैं,
एक वो जिनकी उम्र अधिक है और
दूसरे वो जिसने कम उम्र में बहुत सी ठोकरें खाई हैं।

जो सामान से कभी गर्वित नहीं होते,
अपमान से कभी क्रोधित नहीं होते
और क्रोधित होकर ही कठोर नहीं बोलते,
वास्तव में वही श्रेष्ठ होते हैं।

विद्या ही निर्धन का धन है।

व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है;
और वो अपने अच्छे और
बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है;
और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है।

जो हमारे दिल में रहता है,
वो दूर होके भी पास है।
लेकिन जो हमारे दिल में नहीं रहता,
वो पास होके भी दूर है।

Chanakya Quotes in Hindi

दुनिया में सबसे आसान काम है विश्वास खोना,
कठिन काम है विश्वास पाना,
और उससे भी कठिन है विश्वास को बनाए रखना।

संधि और एकता होने
पर भी सतर्क रहें।

शत्रु के गुण को भी
ग्रहण करना चाहिए।

दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति
नौजवानी और औरत की सुन्दरता है।

जो बुरे वक्त में आपको आपकी कमिया गिनाने लग जाए
उससे ज्यादा मतलबी इंसान कोई हो ही नहीं सकता।

हर एक की सुनो और हर एक से सीखो,
क्योंकि हर कोई सब कुछ नहीं जानता,
लेकिन हर एक कुछ न कुछ अवश्य जानता है।

Chanakya Quotes in Hindi
Image: Chanakya Quotes in Hindi

शिकारपरस्त राजा धर्म और
अर्थ दोनों को नष्ट कर लेता है।

अपने स्थान पर बने रहने से
ही मनुष्य पूजा जाता है।

जो लोग परमात्मा तक पहुंचना चाहते हैं
उन्हें वाणी, मन,
इन्द्रियों की पवित्रता और
एक दयालु ह्रदय की आवश्यकता होती है।

पृथ्वी सत्य पे टिकी हुई है। ये सत्य की ही ताक़त है,
जिससे सूर्य चमकता है और हवा बहती है।
वास्तव में सभी चीज़ें सत्य पे टिकी हुई हैं।

हमें भूत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए,
ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए;
विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं।

जीवन और चुनौतियाँ हर किसी
के हिस्से में नहीं आतीं, क्योंकि
किस्मत भी किस्मत वालों को आजमाती है।

सादगी परम सौंदर्य है,
क्षमा उत्कृष्ट बल है,
विनम्रता सबसे अच्छा तर्क है
और मित्रता सर्वश्रेष्ठ संबंध है।

भाग्य के विपरीत होने पर अच्छा
कर्म भी दु:खदायी हो जाता है।

सभी प्रकार के भय से बदनामी
का भय सबसे बड़ा होता है।

जिस प्रकार एक सूखे पेड़ को अगर आग लगा दी जाये तो
वह पूरा जंगल जला देता है,
उसी प्रकार एक पापी पुत्र पुरे परिवार को बर्वाद कर देता है।

प्रसन्नता सबसे अच्छी दवा है,
बुद्धि सबसे बड़ी संपत्ति है,
धैर्य सबसे बड़ा हथियार है
और विश्वास सबसे मजबूत सुरक्षा है।

शत्रु की बुरी आदतों को
सुनकर कानों को सुख मिलता है।

आलसी का ना वर्तमान होता है,
ना भविष्य।

प्रेम पीपल का बीज है,
जहाँ संभावना नहीं,
वहाँ भी पनप जाता है।

मंदिरों में क्यों ढूंढते हो उसे,
वो तो वहाँ भी हैं,
जहाँ तुम गुनाह और अपराध करते हो।

चोर और राजकर्मचारियों से
धन की रक्षा करनी चाहिए।

सोने के साथ मिलकर चांदी भी
सोने जैसी दिखाई पड़ती है
अर्थात सत्संग का प्रभाव
मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।

हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है.
ऐसी कोई मित्रता नहीं जिसमे स्वार्थ ना हो।
यह कड़वा सच है।

आप कुछ भी चुनने के लिए अवश्य ही स्वतंत्र है,
परंतु जो आप चुनते हैं,
उसके परिणामों से कभी स्वतंत्र नहीं हो पाएंगे।

जीवन की हर सुबह कुछ
शर्तें लेकर आती है,
और जीवन की हर शाम
कुछ अनुभव देकर जाती है।

प्रयत्न ना करने से कार्य
में विघ्न पड़ता है।

ढेकुली नीचे सिर झुकाकर ही कुँए से जल निकालती है
अर्थात कपटी या पापी व्यक्ति सदैव मधुर
वचन बोलकर अपना काम निकालते हैं।

विचार ना करके कार्य करने वाले
व्यक्ति को लक्ष्मी त्याग देती है।

Chanakya Quotes in Hindi

किस उम्र तक पढ़ा जाए
और किस उम्र से कमाया जाए,
ये शौक नहीं बल्कि हालात तय करते हैं।

नीम की जड़ में मीठा दूध डालने
से नीम मीठा नहीं हो सकता,
उसी प्रकार कितना भी समझाओ,
दुर्जन व्यक्ति का साधु बनना मुश्किल है।

सत्य भी यदि अनुचित है
तो उसे नहीं कहना चाहिए।

समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति
अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।

रात भर गहरी नींद आना इतना आसान नहीं है,
उसके लिए दिन भर ईमानदारी से जीना पड़ता है।

दोषहीन कार्यों का
होना दुर्लभ होता है।

भाग्य उनका साथ देता है,
जो हर संकट का सामना करके भी
अपने लक्ष्य के प्रति द्रुढ़ रहते हैं।

चंचल चित वाले के कार्य
कभी समाप्त नहीं होते।

जो अपने कर्तव्यों से बचते हैं,
वे अपने आश्रितों परिजनों
का भरण-पोषण नहीं कर पाते।

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असंभव शब्द का प्रयोग तो केवल कायर करते हैं,
बुद्धिमानी ज्ञानी व्यक्ति अपना रास्ता खुद बनाते हैं।

किसी लक्ष्य की सिद्धि में कभी
भी किसी भी शत्रु का साथ न करें।

जो अपने निश्चित कर्मों का त्याग करके,
और अनिश्चित की चिंता करता है,
उसका अनिश्चित लक्ष्य तो नष्ट होता ही है,
साथ में निश्चित भी नष्ट हो जाता है।

आलसी व्यक्ति का
ना तो वर्तमान होता है
और ना ही भविष्य।

भाग्य पुरुषार्थी के
पीछे चलता है।

शत्रु की दुर्बलता जानने तक
उसे अपना मित्र बनाए रखें।

पंछी कभी अपने बच्चों को
भविष्य के लिए घोंसला बनाके नहीं देते,
वे तो बस उन्हें उड़ने की कला सिखाते हैं।

प्रत्यक्ष और परोक्ष साधनों
के अनुमान से कार्य की परीक्षा करें।

अर्थ और धर्म,
कर्म का आधार है।

उनसे सलाह कभी मत लेना जो उस पड़ाव पर है ही नहीं,
जहाँ तुम पहुँचना चाहते हो,
क्योंकि माता पिता व गुरु के अलावा,
ज्यादातर लोग आपको आपके मार्ग से
भटकाने का कार्य ही करते हैं।

शत्रु दण्ड नीति के ही योग्य है।

जो तुम मांगते हो उसके मिलते ही उसका मूल्य कम हो जाता है,
और फिर से कुछ मांगने की इच्छा जगती है,
इसलिए मांगने के बजाय उस खजाने की तरह बढ़ो
जो तुम्हारे भीतर छुपा है।

कठोर वाणी अग्नि दाह से भी
अधिक तीव्र दुःख पहुँचाती है।

समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता है,
कि आपका सलाहकार कौन है,
यह बहुत महत्वपूर्ण है,
क्योंकि दुर्योधन शकुनी से सलाह लेता था
और अर्जुन श्रीकृष्ण से।

मन बड़ा चमत्कारि शब्द है,
इसके आगे ‘न’ लगने पर यह नमन हो जाता है,
और इसके पीछे ‘न’ लगने पर यह मनन हो जाता है,
इसलिए जीवन में नमन और मनन करते रहिए,
जीवन सफल ही नहीं बल्कि सार्थक भी हो जाएगा।

शक्तिशाली शत्रु को कमजोर
समझकर ही उस पर आक्रमण करें।

शांत होने की कोई तरकीब नहीं होती,
सिर्फ अशांत होने की तरकीबें होती है,
और अशांत होने की तरकीबें समझ में आ जाए
तो व्यक्ति शांत हो जाता है।

अपने से अधिक शक्तिशाली और
समान बल वाले से शत्रुता ना करें।

Chanakya Quotes in Hindi

चींटी से मेहनत सीखो,
बगुले से तरकीब,
और मकड़ी से कारीगरी
और अपने विकास के लिए अंतिम समय तक
संघर्ष करो क्योंकि संघर्ष ही जीवन है।

सुख और दुःख में समान रूप
से सहायक होना चाहिए।

मंत्रणा को गुप्त रखने से ही
कार्य सिद्ध होता है।

स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों को
सम्मुख रखकर दोबारा उन पर विचार करें।

योग्य सहायकों के बिना निर्णय
करना बड़ा कठिन होता है।

आवश्यकता से अधिक ईर्ष्या,
आपके अंदर आत्मविश्वास
की कमी को झलकाती है।

अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने
पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।

एक अकेला पहिया
नहीं चला करता।

जीवन के लेखक बनो
और अपने मन के पाठक,
क्योंकि जितना अधिक खुद के बारे में ज्ञान अर्जित करोगे,
उतना ही कम तुम्हें दूसरों की राय पर निर्भर होना पड़ेगा।

ज्ञानी और छल-कपट से रहित शुद्ध
मन वाले व्यक्ति को ही मंत्री बनाएँ।

अविनीत स्वामी के होने से तो
स्वामी का ना होना अच्छा है।

हे बुद्धिमान लोगों,
अपना धन उन्ही को दो जो उसके योग्य हों
और किसी को नहीं,
बादलों के द्वारा लिया गया समुद्र का जल
हमेशा मीठा होता है।

एक अनपढ़ व्यक्ति का जीवन उसी तरह से बेकार है
जैसे की कुत्ते की पूँछ,
जो ना उसके पीछे का भाग ढकती है
ना ही उसे कीड़े-मकौडों के डंक से बचाती है।

स्वभाव का अतिक्रमण
अत्यंत कठिन है।

धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए
दूसरों की सेवा करते हैं।

बुद्धि से पैसा कमाया जा सकता है,
मगर पैसे से बुद्धि नहीं।

झुकना बहुत अच्छी बात है
नम्रता की पहचान होती है,
मगर आत्मसम्मान को खोकर
झुकना खुद को खोने जैसा है।

भविष्य के अन्धकार में छिपे कार्य के लिए
श्रेष्ठ मंत्रणा दीपक के
समान प्रकाश देने वाली है।

दुष्ट की मित्रता से शत्रु की
मित्रता अच्छी होती है।

दौलत, दोस्त ,पत्नी और राज्य
दोबारा हासिल किये जा सकते हैं,
लेकिन ये शरीर दोबारा
हासिल नहीं किया जा सकता।

मंत्रणा रूप आँखों से शत्रु के छिद्रों अर्थात
उसकी कमजोरियों को देखा-परखा जाता है।

दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती
अर्थात आवश्कयता के
अनुसार साधन जुटाने चाहिए।

एक संतुलित मन के बराबर कोई तपस्या नहीं है।
संतोष के बराबर कोई खुशी नहीं है।
लोभ के जैसी कोई बिमारी नहीं है।
दया के जैसा कोई सदाचार नहीं है।

राजनीति का संबंध केवल अपने राज्य को
समृद्धि प्रदान करने वाले मामलों से होता है।

राज्य का आधार अपनी
इन्द्रियों पर विजय पाना है।

ईर्ष्या करने वाले दो समान व्यक्तियों
में विरोध पैदा कर देना चाहिए।

प्रकृति (सहज) रूप से प्रजा के संपन्न होने से
नेता विहीन राज्य भी संचालित होता रहता है।

जहा आदर नहीं वहाँ जाना मत,
जो सुनता नहीं उसे समझाना मत,
जो पचता नहीं उसे खाना मत,
और जो सत्य पर भी रूठे,
उसे मनाना मत।

जो बीत गया सो बीत गया,
यदि हमसे कोई गलत काम हो गया है
तो उसकी चिंता न करते हुए वर्तमान को
सुधारकर भविष्य को संवारना चाहिए।

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